उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के क्रियाकलापों में पारदर्शिता लाने तथा परीक्षा संबंधी अन्य कार्यों में शुचिता सुनिश्चित करने के लिए आंतरिक विजिलेंस प्रणाली स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए आयोग में विजिलेंस अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। आयोग अध्यक्ष के डॉ. प्रशांत कुमार के कार्यभार ग्रहण करने के बाद मंगलवार को हुई आयोग की पहली बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में तय हुआ कि विज्ञापन संख्या 51 के तहत अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 910 पदों पर आयोजित लिखित परीक्षा के बाद साक्षात्कार के संबंध में लम्बित बिंदुओं का परीक्षण कर शीघ्र निर्णय लिया जाएगा।
UPESSC Adv 51 Interview Latest Updates
- चयन आयोग की बैठक में आंतरिक विजिलेंस प्रणाली स्थापित करने पर बनी सहमति
- आयोग के काम में पारदर्शिता के लिए होगा विजिलेंस अधिकारी
- [सुधार की कवायद] | एक साल में कार्यभार ग्रहण नहीं तो चयन रद्द
आयोग ने परीक्षा नियंत्रक से अपेक्षा की है कि विगत समय में स्थगित टीजीटी एवं पीजीटी की परीक्षाओं तथा शिक्षक पात्रता परीक्षा के संबंध में परीक्षा तिथि निर्धारित करने के लिए अन्य आयोगों व भर्ती संस्थाओं के परीक्षा कैलेंडर का अध्ययन कर समय सारिणी तैयार कर आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें जिसके आधार पर इन परीक्षाओं के आयोजन की तिथियों का निर्धारण किया जा सके। साथ ही आगामी परीक्षाओं के आयोजन के लिए परीक्षा केंद्रों तथा विभिन्न प्रकार की एजेंसियों के चयन आदि की कार्यवाही को भी समयबद्ध व पारदर्शी रूप से सम्पन्न कराया जाए ताकि परीक्षाओं को पूर्ण पारदर्शिता व शुचिता के साथ कराने के लिए कैलेंडर जारी किया जा सके। आयोग के पीआरओ संजय कुमार सिंह के अनुसार न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में अन्य प्रकरणों पर विचार किया गया।
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प्रमुख बिंदु:
- उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की व्यवस्था में हुआ बदलाव
- उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग में अगली भर्ती तक मान्य होता था पैनल
प्रदेश के सहायता प्राप्त महाविद्यालयों और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की भर्ती में नए चयन आयोग के माध्यम से पुरानी व्यवस्था में बड़ा बदलाव हो गया है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम के नए प्रावधान के अनुसार चयनित शिक्षकों का पैनल (चयन सूची) केवल एक वर्ष तक ही प्रभावी रहेगा। इसका उद्देश्य समयबद्ध तरीके से चयन प्रक्रिया पूरी करना है। हालांकि जिस प्रकार हर भर्ती को लेकर कानूनी विवाद होते हैं चयनितों के एक साल में कार्यभार ग्रहण करना चुनौती होगा।
नई व्यवस्था के अनुसार, चयन आयोग अभ्यर्थियों का चयन करने के बाद चयन सूची प्राधिकृत अधिकारी (निदेशक) को भेजेगा। प्राधिकृत अधिकारी चयनित अभ्यर्थियों को संस्थाओं का आवंटन करने के पश्चात चयनित अभ्यर्थियों के नाम का पैनल संस्थाओं के नियुक्ति प्राधिकारी अथवा प्रबंधक को भेजेगा। ऐसी सूचना प्राप्त होने के 30 दिन के अंदर नियुक्ति प्राधिकारी चयनित अभ्यर्थी को नियुक्ति पत्र जारी करेगा। यदि कोई अभ्यर्थी निर्धारित समयसीमा 30 दिन में कार्यभार ग्रहण नहीं करता है तो नियुक्ति प्राधिकारी सूचना निदेशक को देगा और निदेशक मेरिट क्रम में अगले अभ्यर्थी के नाम की संस्तुति करेगा, जिसे नियुक्ति पत्र जारी करेगा। किंतु यह प्रक्रिया प्रथम अभ्यर्थी के नियुक्ति पत्र जारी किए जाने से अधिकतम एक साल के अंदर पूरी करनी होगी। इसके बाद पैनल निरस्त हो जाएगा।
इससे पहले उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग में सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर और प्राचार्य भर्ती की चयन सूची उस विषय की अगली भर्ती तक मान्यता होती थी। उदाहरण के तौर पर विज्ञापन संख्या 50 में यदि वाणिज्य विषय की भर्ती हुई है तो वह विज्ञापन संख्या 51 में उस विषय का विज्ञापन जारी होने तक मान्य रहेगा। वहीं उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में एडेड माध्यमिक विद्यालयों की भर्ती की चयन सूची की कोई समयसीमा नहीं थी। यही कारण है कि टीजीटी-पीजीटी भर्ती के विवाद सालों कोर्ट में चलते रहते हैं। अब चूंकि दोनों संस्थाओं का विलय चयन आयोग में हो गया है इसलिए सभी भर्तियों में नई व्यवस्था लागू होगी। नवगठित आयोग ने प्रतीक्षा सूची की व्यवस्था भी समाप्त कर दी है। पूर्व में उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग और शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में पदों की संख्या के सापेक्ष अधिकतम 25 प्रतिशत तक प्रतीक्षा सूची जारी करने की व्यवस्था थी।
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